समस्तीपुर/रोसड़ा: रोसड़ा शहर के बहुप्रतीक्षित बाईपास सड़क निर्माण को लेकर क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। परियोजना को सरकार की ओर से सुरक्षा/प्रशासनिक स्वीकृति मिलने और संबंधित पत्र जारी होने के बाद जहां स्थानीय विधायक वीरेंद्र कुमार ने इसे अपने लंबे प्रयासों और लगातार पहल का परिणाम बताया है, वहीं दूसरी ओर सांसद संभावित चौधरी के समर्थकों द्वारा इस कार्य का श्रेय लेने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर गांव-शहर की चौपालों तक इस मुद्दे पर चर्चा गर्म है और श्रेय की खुली जंग छिड़ी हुई है।
जानकारी के अनुसार रोसड़ा नगर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की गंभीर समस्या को देखते हुए वर्षों से बाईपास सड़क की मांग उठती रही थी। विधायक वीरेंद्र कुमार ने इस मुद्दे को कई बार विधानसभा में उठाया, विभागीय स्तर पर लगातार पत्राचार किया और अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर इसे आगे बढ़ाया। हाल ही में जब परियोजना को आवश्यक स्वीकृति मिली और पत्र सार्वजनिक हुआ, तब इसे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया।
इधर सांसद संभावित चौधरी के समर्थक लगातार सोशल मीडिया पोस्ट और जनसभाओं में यह दावा कर रहे हैं कि बाईपास सड़क का प्रस्ताव उनके प्रयासों से आगे बढ़ा। इसे लेकर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर पोस्ट और टिप्पणियों के माध्यम से एक-दूसरे पर श्रेय लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि विधायक वीरेंद्र कुमार क्षेत्रीय समस्याओं और विकास के मुद्दों को लगातार विधानसभा में उठाते रहे हैं और योजनाओं को धरातल पर लाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि सांसद संभावित चौधरी द्वारा क्षेत्र के मुद्दों को अपेक्षाकृत कम उठाया जाता है, जिससे समर्थकों के बीच बहस और तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बाईपास जैसी बड़ी परियोजना चुनावी दृष्टि से भी बेहद अहम होती है, इसलिए उसका श्रेय लेने की होड़ स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। उनका कहना है कि यदि सभी जनप्रतिनिधि मिलकर परियोजना को समय पर पूरा कराने पर ध्यान दें, तो रोसड़ा शहर को जाम की समस्या से बड़ी राहत मिल सकेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। फिलहाल बाईपास सड़क को लेकर श्रेय की यह सियासी जंग थमने के बजाय और तेज होती दिख रही है।
संपादकीय: विकास पर नहीं, श्रेय पर क्यों होती है सियासत?
रोसड़ा बाईपास सड़क को मिली स्वीकृति क्षेत्र के लिए निस्संदेह एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। वर्षों से जाम और ट्रैफिक की समस्या झेल रहे शहरवासियों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि विकास की हर बड़ी पहल के साथ श्रेय लेने की राजनीति भी उतनी ही तेजी से शुरू हो जाती है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्षेत्र की समस्याओं को उठाना और उनके समाधान के लिए मिलकर प्रयास करना होती है। विकास कार्य किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था, सरकार और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है। ऐसे में जब किसी परियोजना को लेकर श्रेय की होड़ शुरू हो जाती है, तो असली मुद्दा पीछे छूट जाता है और जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है।
रोसड़ा के लोगों की अपेक्षा भी यही है कि उनके प्रतिनिधि आपसी प्रतिस्पर्धा के बजाय विकास की गति तेज करने पर ध्यान दें। यदि सभी मिलकर परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने में सहयोग करें, तो इसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा और क्षेत्र का भरोसा भी मजबूत होगा। आखिरकार जनता को श्रेय की नहीं, बल्कि सड़क, रोजगार और सुविधाओं की जरूरत है।